अंडाशय में सिस्ट क्यों बनता है?HealthPlanet

Posted on Thu 22nd Dec 2022 : 12:28

जिस प्रकार गांठ तरल पदार्थ से भरी एक थैलीनुमा आकृति होती है, उसी के समान अंडाशय में विकसित होने वाली गांठ भी तरल से भरी एक थैली होती है जो आपके दोनों में से एक या दोनों अंडाशयों में विकसित होती है। राजमा के आकार में बने आपके दोनों अंडाशय, शरीर के वे अंग होते है जिनमें गर्भाशय में पहुँचने से पूर्व, आपके अंडे संग्रहीत रहते हैं और जिससे उसमें प्रजनन उर्वरता उत्पन्न होती है। ये गर्भाशय की दोनों ओर पेट के नीचे के स्थान पर स्थित होते हैं। महिलाओं के शरीर में ये दोनों अंडाशय, अंडे के साथ एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन की रचना करते हैं।

ओवेरियन सिस्ट अर्थात् अंडाशय में गांठ होने का सरल अर्थ- ओवरी एक तरल पदार्थ से भरी थैली होती है जबकि सिस्ट का मतलब गांठ होता है। जब तक सिस्ट या गांठ एक बड़ा आकार ना ले लें, तब तक अंडाशय में गांठ बनने के कोई विदित लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

ओवरियन सिस्ट के कारण और ज़रूरी प्रकार-

एक क्रियात्मक (फंक्शनल) आवेरियन गांठ जो एक महिला के अंदर गर्भावस्था के दौरान पाई जाती है, वह आमतौर पर आपके या आपके बच्चे के लिए कोई परेशानी नहीं पैदा करती है। क्रियात्मक ओवेरियन सिस्ट दो प्रकार की होती है- फॉलिक्युलर सिस्ट और ल्युटियम सिस्ट।

ओवेरियन सिस्ट के कारण और ज़रूर प्रकार निम्नलिखित है-

1 फॉलिकुलर सिस्ट- महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान तरल पदार्थ युक्त थैलीनुमा आकृति अर्थात् ओवरी में उत्पन्न होने वाले अंडों को फॉलिकल कहा जाता है। अमूमन हर माह ये थैली फट जाती है और अंडे इससे बाहर निकल जाते हैं लेकिन जब यह थैली फटने में असमर्थ रहती है, उस समय अंडाशय में मौजूद तरल पदार्थ सिस्ट या गांठ का रूप ले लेता है।

2 कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट-
ये सिस्ट आमतौर पर फॉलिकल निकलने के बाद स्वयं ही नश्ट हो जाते हैं, किंतु किसी कारण यदि ये नश्ट नहीं हो पाते हैं तो इसमें जगह से अधिक तरल एकत्रित हो जाता है जो कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट में तब्दील होने का कारण बन जाता है।

3 पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम-
महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए महिलाओं को सावाधनीपूर्वक मूल्यांकन, उचित उपचार और समय पर हस्तक्षेप की अत्यधिक ज़रूरत होती है। सही समय पर उपचार न होने पर पीसोओएस ग्रस्त महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रोल, चिंता और अवसाद, दिल का दौरा आदि बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
इससे ओवरी के भीतर कई छोटी-छोटी गांठे या सिस्ट पैदा हो जाते है जिसके बढ़ने पर महिलाओं को बांझपन की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

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